फिर भी लोग इसे कानून की नाक के नीचे खेलते है। भारत के अलग अलग राज्यों में कुछ खेलों पर पैसा लगाने की छूट है जैसे गोवा में कैसिनो को वैद्य किया गया है। हालांकि अंग्रेजो द्वारा पारित एक कानून 1867, जोकि सार्वजनिक जुआ अधिनियम है यह बाध्य करता है कि कोई भी व्यक्ति न जुआ खेले और न ही जुआ खिलाये।

कौन है Satta Matka किंग?
ट्रेडिशनल मटके के जन्मदाता रतन खत्री को कहा जाता है। इन्हें ही मटका किंग के नाम से लोग पहचानते हैं। रतन खत्री की प्रतिदिन की औ 1 करोड़ रुपये से अधिक की थी। उन्हें मटके का बेताज बादशाह कहा जाता था। 2020 को रतन खत्री की मृत्यु हो गयी थी।

विभाजन के समय रतन खत्री कराची से मुंबई आये। इस दौरान मुम्बई में अंडरवर्ल्ड का साया था और सट्टा कारोबार भी play bazaar खूब फल फूल रहा था। तब रतन खत्री ने इस गेम में की शुरुआत की जिसमें मटके के अंदर पर्ची डाली जाती थी। उस समय न तो इंटरनेट का जमाना था और न ही मोबाइल फोन का

उस समय टेलीफोन ही सूचना भेजने की सहारा था। सटकी मटकी का रिजल्ट आते ही कुछ ही देर में यह पूरे देश में फैल जाता था। इसी बात से अंदाजा लगाया जा सकता है की मटके की लोकप्रियता कितनी थी।

उस समय भारत मे टेलीफोनिक शुरुआत दौर था। यदि रात्रि 9 बजे के बाद आप किसी को फोन भी करना चाहें तो नहीं कर सकते थे। क्योंकि सट्टे मटके लोकप्रियता की की वजह से सारी लाइनों पर सट्टेबाज होते थे जो एक दूसरे को लकी नम्बर बता रहे होते थे। हालांकि रतन खत्री की सफल सट्टे के पीछे कल्याणजी भगत का भी हाथ था। कल्याण जी भगत सीधे साढ़े आदमी थी वे कच्छ से मुम्बई गए और वहां राशन की दुकान चलाते थे। अपनी दुकान पर आने वाले ग्राहकों के मुह से वे न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज की बातें सुनते थे तब उन्हें लगा कि सट्टे के व्यापार में तगड़ा स्कोप है। इसके बाद रतन खत्री और कल्याण जी भगत पार्टनर हो गए और सट्टा मटका चल निकला।

कब शुरू हुआ सट्टा मटका?
सट्टा मटका को अंको का खेल कहा जाता है। अगर आप बुद्धिमानी एवं आंकड़ो का रिसर्च करने में माहिर हैं तो यह खेल बेहतरीन तरीके से खेल सकते हैं। भारत मे सट्टा मटका बेहद तीव्र गति से प्रसिद्ध हो रहा है। करोड़ों लोग इस खेल में अपना हाथ आजमा रहे है। उनकी लालसा बस यही रहती है कि इस खेल से वे ज्यादा से ज्यादा मुनाफा कमा सके।

भारत में सट्टा मटका का जन्म 1950 के दशक में हुआ। शुरुआत में में इसे Satta Matka ( सटकी मटकी ) नहीं बल्कि ‘अंकड़ा जुगर‘ कहा जाता था इसके मतलब है अंको की जोड़ी। लेकिन इसमें अंको की जोड़ी मटके का प्रयोग करके बनाई जाती थी जिससे लोग इसे सट्टा मटका के नाम से जानने लगे। Satta Matka खेल न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज के आधार पर शुरू किया गया खेल है।

न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज में सट्टा कॉटन के खुली एवं करीबी दर पर अनुमान लगाकर पैसा लगाते थे। लोग कपास की अनुमानित मूल्य पर पैसा लगाकर सट्टा खेलते थे। कपास का भाव न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचेंज से मुम्बई कॉटन एक्सचेंज को टेलीप्रिंटर के माध्यम से भेजा जाता था। 1961 में यह खेल बन्द कर दिया गया तब इस खेल के अल्टरनेटिव को तलाश की गई और सट्टा मार्किट को खत्म होने से बचाने के लिए Satta Matka की उत्पत्ति हुई।

शुरुआत में इस गेम को ऑफ़लाइन खेला गया जिसमें मटके अंदर पर्ची डाली जाती थी। लेकिन वर्तमान में इसे अब ऑनलाइन खेला जा रहा है। इसके बावजूद आज भी लोग इसे Satta Matka ही कहते हैं।

कैसे खेला जाता है सट्टा मटका
सट्टा मटका आजकल ऑनलाइन खेला जाता है। आप एजेंट के माध्यम से पैसा लगवा सकते हैं। लेकिन पैसा यूँही हवा में तीर लगा के नहीं लगाया जाता। आपको सट्टा मटका एवं अंको से जुड़ी अच्छी समझ होनी चाहिए तभी आप Satta Matka ( सटकी मटकी ) के गेम में मुनाफा कर सकते हैं।

यदि आप जानना चाहते हैं कि सट्टा मटका कैसे खेलें, तो आप इस लेख को आगे पढ़ते रहिए। सटकी मटकी खेल से संबंधित पूरी जानकारी आपको दी जाएगी।

सट्टा मटका कैसे खेलें ? इससे पहले आप Satta Matka की बेसिक बातें समझ लीजिए। इस गेम में यदि आपसे कोई कहे कि आपको 1 का 4 मिलेगा इसका अर्थ है कि आपको 100 का 400 रुपया दिया जाएगा। Satta Matka में आपको 100 गुना तक मिल सकता है। शायद यही वजह है कि लोग इसके प्रति ज्यादा आकर्षित होते हैं। आपको बता दें कि यह पोस्ट हम सिर्फ जानकारी के उद्देश्य से लिख रहें हैं। हम इस खेल को बढ़ावा नहीं देते हैं। यह खेल एक गैरकानूनी खेल है।

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